Tuesday, November 24, 2020
स्वर्ण मंदिर का सच
Thursday, September 3, 2020
लाकडाउन के हीरो
इस मिल मालिक ने नहीं निकाला, अपने,
17500 वर्करों में से किसी एक को भी! के.पी.आर मिल्स के मालिक हैं और अंडरवियर बनियान बनाते हैं। भारत ही नहीं, दुनिया की बड़ी कंपनियां उन से माल बनवाती हैं। तिरुपुर और कोयंबटूर में उनकी 4 फैक्ट्रियां हैं जिनमें 22000 वर्कर काम करते हैं।"
"रामास्वामी ने 17,500 हजार जो माइग्रेंट लेबर थी (4500 लोकल, निकट के अपने घर पर रहे) उसको अपनी फैक्ट्री के ही हॉस्टलों में ठहरने को कह दिया और कहा कि जब तक भी lock-down चलेगा तुम लोग चिंता मत करो, तुम्हारा सारा खाना पीना ठहरना, यहां तक की मोबाइल की चार्जिंग भी मेरी तरफ से फ्री।
रामास्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया "प्रति लेबर ₹13500 मासिक का उसका खर्चा आया और इस नाते से कुल 30 करोड रूपया, लगभग 2 महीने में खर्च हो गया। क्योंकि उसने एक भी आदमी की एक भी दिन की सैलरी भी नहीं काटी।"
जब पूछा "आपने इतना नुकसान क्यों सहन किया?"
उन्होंने कहा "मैंने दोनों बातें सोची। एक तो यह मेरी नैतिक जिम्मेवारी थी कि मैं इनको बेरोजगार ना करूं, आखिर मुझे इतना बड़ा बनाने में इन्ही लोगों का ही तो हाथ है। फिर मुझे यह भी था की लॉकडाउन के बाद मुझे भी स्किल्ड लेबर नहीं मिलेगी।
इस कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 3250 करोड़ का है लेकिन बड़ी बात है, केपी रामा स्वामी जी ने लेबर के बारे में उच्च स्तरीय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। भारत ऐसे ही लोगों के सहारे चल रहा है.....
Saturday, January 6, 2018
पित्र दोष से मुक्ति के उपाय
Saturday, April 22, 2017
HAWAN VIDHYA हवन विधि
दैनिक हवन मे सबसे पहले अग्नि प्रज्वलित करे । किसी लकड़ी( लकड़ी पीपल की या आम की बरगद के ले तो उत्तम रहेगा) पर या गाय के कंडे पर अग्नि प्रज्वलित करे । किसी छोटे से पात्र मे भी गाय के कंडे पर या लकडी पर अग्नि प्रज्वलित कर सकते है ।पात्र तांबे का या पीतल का या मिट्टी का होना चाहिए । लोहे के पात्र का उपयोग हवन के लिए नही करना है । नीचे लिखी आहूतिया केवल घी से देनी है । आहूति देने के बाद आहूति देने के चम्मच मे बचा हुआ घी इदं न मम के उच्चारण के साथ पास मे रखे पानी के पात्र मे टपकाते जाऐ ।
चार घी की आहुतियाँ
इस मन्त्र से वेदी के उत्तर भाग में जलती हुई समिधा पर आहुति देवें।
1) ओम् प्रजापतये स्वाहा | इदं प्रजापतये - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रजा अर्थात सब जगत के पालक, स्वामी, परमात्मा के लिए मैं त्यागभाव से यह आहुति देता हूँ।अथवा, प्रजापति सूर्य के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ
2)ओम् इन्द्राय स्वाहा | इदं इन्द्राय - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक परमऐश्वर्य-सम्पन्न तथा उसके दाता परमेश्वर के लिए मैं यह आहुति प्रदान करता हूँ।अथवा ऐश्वयर्शाली, शक्तिशाली वायु व विद्युत के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।
3)ओम् अग्नये स्वाहा | इदमग्नये - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रकाशस्वरूप दोषनाशक परमात्मा के लिए मैं त्यागभावना से धृत की हवि देता हूँ।यह आहुति अग्निस्वरूप परमात्मा के लिए है, यह मेरी नहीं है।अथवा, यज्ञाग्नि के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।
4)ओम् सोमाय स्वाहा | इदं सोमाय - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक, शांति -सुख-स्वरूप और इनके दाता परमात्मा के लिए त्यागभावना से धृत की आहुति देता हूँ ।अथवा, आनन्दप्रद चन्द्रमा के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।
5) ॐ गं गणपतये स्वाहा । इदं गणपतये इदं न मम ।
इसके बाद आप जो भी और जितनी भी चाहे आहूति दे सकते है । जैसे गणपति जी की या गायत्री जी की या अपने ईषट की ।
उसके बाद अंतिम आहूतिया इस प्रकार देनी है ।
6) ॐ भूः स्वाहा । इदं अगनेय इदं न मम ।
7) ॐ भुवः स्वाहा: । इदं वायवे इदं न मम ।
8) ॐ स्वः स्वाहा । इदं सूर्याय इदं न मम ।
9) ॐ भूर्भुवः स्वाहा। इदं न मम ।
10) ॐ प्रजापतये स्वाहा । इदं प्रजापतये इदं न मम ।
इस प्रकार आप घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन कर सकते हो । आज के समय मे प्रत्येक हिन्दू के घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन होना चाहिए ।आप सभी से निवेदन है कि आप इस सन्देश को अधिक से अधिक हिंदुओं तक पहुचाये ।
अग्निहोत्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते है ।
धन्यवाद
पं नलिन शर्मा
Mob No :- 09179271166
हेमन्त शर्मा :- 08460205797
उज्जैन
Wednesday, January 1, 2014
एक सत्य घटना
घटना कुछ दिनों पूर्व की है आगरा से १० कम दूर एक यातायात जाम लगा हुआ था दोनों और के वाहन फसे हुए थे न इधर के वाहन उधर जा सकते थे और न उधर के वाहन इधर आ सकते थे इस बीच एक दो व्यक्तियों के निकलने के लिए जो जगह बची हुए थी उसमे भी दोपहिया वाहन और साइकिल वाले आकर जाम को अपना समर्थन दे रहे थे यह घटनाक्रम एक घंटे तक चलता रहा हलकी हलकी बारिश भी हो रही थी सब लोग अपनी अपनी गाड़ियों में बैठे हुए अपनी मस्ती में मस्त थे और जाम के हटने का इंतज़ार कर रहे थे उसी बीच उसी जाम में फसे हुए वाहनों में से कुछ लोग निकलकर सडक पर आये और उन १५-२० लोगों ने अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए २०-३० मिनट के अन्दर सारा यातायात व्यवस्थित करके आवागमन की स्थिति चालु कर दी उनमे से कुछ लोग ऐसे भी थे जो महँगी गाड़ियों में से उतरकर आये थे ,कुछ लोग दुपहिया वाहन चालक थे तो कुछ लोग साइकिल चालक थे लेकिन सभी का लख्य और ध्येय और इरादा एक ही था के जाम को हटाकर परिवहन की स्थिति को सुचारू रूप से चालू करना उनमे से सायद ही कोई एक दूसरे को जानता था लेकिन वहां पर सब ने एक दूसरे को जाने बिना कंधे से कन्धा मिलाकर काम किया उस जाम में फसे हुए लोगों में से सायद ही किसी ने उन लोगों को धन्यवाद कहा होगा लेकिन उन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई बिना किसी की धर्म,जाति का पता किये बगैर सबकी मदद की.
यह घटना ठीक उसी तरह लगाती है जैसे के आजकल इन्टरनेट पर एक विडियो दिखाया जा रहा है जिसमे एक महानगर में बारिश की वजह से एक पेड़ सड़क पर आ गिरता है और फिर सब व्यवस्था ठप हो जाती है वही पर उस जगह का नेता सम्बंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देता है पुलिस वाला अपनी अतिरिक्त आय का जरिया ढूंढ रहा होता है एक नवयुवक जोड़ा प्रेम प्रसंग के वार्तालाप में व्यस्त दिखाई देता है तो कुछ लोग भारत देश और इसकी व्यवस्था को गाली देते हुए दिखाई देते है वही पर से इस भीड़ में से एक १० साल का लड़का आता है और अकेले अपने दम पर उस पेड़ को वहा से हटाने का प्रयास करता है उसके इस साहस को देख दूसरे लड़के भी उसकी मदद करने के लिए आगे आ जाते है और सभी लोग मिलकर वहा से उस पेड़ को उठाने का प्रयास करते है उन बच्चो के उस साहस को देखकर वहा पर निर्जीव से बुत बने हुए लोगों में अचानक जान आ जाती है और सभी लोग उनकी मदद करने के लिए अपना अहंकार,हठ छोड़कर उस पेड़ को आसानी से एक तरफ कर देते है बाद में उस सच्चे नेता उस १० साल के लड़के को सभी लोग सलाम करते हुए दिखाई देते है
यह विडियो ऐसी किसी घटना से प्रभावित था या यह घटना उस विडियो से प्रभावित थी यह अलग बात है लेकिन एक बात तो तय है के हमारी हठधर्मिता और अहंकार से हम हर रोज न जाने कितने लोगों को नुक्सान पहुचाते है ऐसा जाम आमतौर पर हर नगर,हर गली में देखने को मिल जाता है हम लोग हर जगह पर चक्का जाम लगा कर बैठ जाते है और हम यह भी नहीं सोचते है के हम हमारी इस हरकत से न जाने कितनी जिंदगियों को दाव पर लगा रहे है अगर कोई बीमार व्यक्ति जिसे अपनी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द अस्पताल पहुचना है ,अगर वो उस जाम में फस जाए तो फिर उस स्थिति में उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा ?हम,आप या फिर जाम लगाने वाले वो लोग या फिर यह व्यवस्था ?हमारे देश में आये दिन हड़ताल,बंद और चक्काजाम होता रहता है और हमारे देश के कुछ लोग मौकापरस्त नेताओ की बातो में आकर इस देश को और इस देश की जनता को कितनी हानी पहुचाते है यह हमे भी पता नहीं होगा ऐसा करके इस देश की गरीब जनता को हम और कितना गरीब कर देते है क्या यह हमने कभी सोचा है अगर किसी एक पार्टी के नेता ने दूसरी पार्टी के किसी नेता के खिलाफ कुछ बोला तो उस पार्टी के लोग सडको पर उतरकर जो तोड़फोड़ करते है उसकी तो कोई और मिसाल है ही नहीं यह कहाँ का लोकतंत्र है हम हमारे देश को ही नुक्सान पहुचाते है यह कहाँ की नैतिकता है इस आग में फिर जलता कौन है अमीर या गरीब ?यह सब जानते है हम लोग अपने स्वयम के हाथो से अपने लिए ऐसी साजिस और चक्रव्यूह की रचना कर दते है जिसमे से वापिस निकलना संभव नहीं हो पाता बाद में इन सबका श्रेय हम या तो सरकार को या फिर व्यवस्था को या फिर अपनी आदत के मुताबिक़ ऊपर वाले को दे देते है लेकिन हम अपने बारे में कभी टिपण्णी नहीं करते है के इन सबका वास्तविक जिम्मेदार कौन है ज़रा सोचिये………………..फिर देखिये
अगर आप लोगों को मेरा यह आलेख पसंद आया है तो इसे दूसरों तक पहुचाइए
जय हिंद
हेमंत कुमार शर्मा
Sunday, December 29, 2013
Aam Aadami Party
मेरा देश महान
जय हिन्द

