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Tuesday, November 24, 2020

स्वर्ण मंदिर का सच

यह चित्र 1908 को लिया गया अमृतसर के #हरमंदिर साहब का है जिसे अंग्रेज़ ईसाईयों व वामपंथियों ने गोल्डन टेंपल कहना शुरू किया...
अब यह चित्र देखकर आपके मन में यह प्रश्न उठेगा कि यहां हिन्दू साधु ध्यान कैसे कर रहे हैं वो भी सिक्ख तीर्थ हर मन्दिर साहब में ?
चलिए तनिक इतिहास के कुछ पन्ने पलटते हैं !

सिक्खों के पहले गुरु गुरुनानक थे
2- गुरु अंगददेव
3- गुरु अमरदास
4- गुरु रामदास
5- गुरु अर्जुनदेव
6- गुरु हरगोविंद
7- गुरु हरराय
8 - गुरु हरकिशन
9- गुरु तेगबहादुर
10- गुरु गोविंद सिंह

सभी गुरुओं के नाम में राम, अर्जुन, गोविंद (कृष्ण), हर(महादेव) हैं।

जब औरँगजेब ने कश्मीर के पंडितो को इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा तो कश्मीरी पंडितों ने गुरू तेगबहादुर जी के पास मदद के लिए गुहार लगाई तब गुरु तेगबहादुर जी ने कहा कि जाओ औरंगजेब से कहना यदि हमारे गुरु तेगबहादुर जी यदि मुसलमान बन गए तो हम भी मुसलमान बन जाएंगे, 

ये बात पंडित औरंगजेब तक पहुंचा देते हैं तब औरंगजेब गुरु तेगबहादुर जी को दिल्ली बुलाकर मुसलमान बनने के लिए दवाब डालता है लेकिन गुरु जी द्वारा अस्वीकार करने पर उन्हें यातना देकर मार दिया जाता है।

अब प्रश्न ये है कि यदि सिक्ख हिन्दू से अलग  हैं तो कश्मीरी पंडितों के लिए गुरु तेगबहादुर ने अपने प्राण न्यौछावर क्यों कर दिए ?

गुरु गोविन्द सिंह का प्रिय शिष्य बंदा बहादुर (लक्ष्मण दास) भारद्वाज गोत्र का ब्राम्हण था जिसने गुरु गोविन्द सिंह जी के बाद पंजाब में मुगलों की सेना को नाकों चने चबवा दिए -
कृष्णदत्त जैसे ब्राह्मण ने गुरु के सम्मान के लिए अपने सम्पूर्ण परिवार को कुर्बान कर दिया...

राजा रणजीत सिंह कांगड़ा की ज्वालामुखी देवी के भक्त थे उन्होंने देवी मंदिर का पुर्ननिर्माण कराया....

आज भी अनेक सिक्ख व्यापारियों की दुकानों में गणेश व देवी की मूर्तियां रहती हैं, आज भी सिक्ख नवरात्रि में अपने घरों में जोत जलाते हैं, 
***
अब प्रश्न ये उठता है कि सिक्ख कब, क्यों व कैसे हिन्दुओं से अलग कर दिए गए ?

1857 की क्रांति से डरे ईसाई (अंग्रेज़) ने हिन्दू समाज को तोड़ने की साज़िश रची!
1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज का गठन किया, जिसका केंद्र तत्कालीन पंजाब का लाहौर था। 

स्वामी दयानंद ने ही सबसे पहले स्वराज्य की अवधारणा दी। जब देश का नाम हिंदुस्तान तो ईसाईयों (अंग्रेज़) का राज क्यों!

स्वामी दयानंद के इन विचारों से पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियों की बाढ़ आ गयी।

 लाला हरदयाल, लाला लाजपतराय, सोहन सिंह, भगतसिंह के चाचा अजीत सिंह जैसे क्रांन्तिकारी नेता आर्य समाजी थे।

 अतः ईसाई मिशनरियों(अंग्रेजो) ने अभियान चलाया कि सिक्ख व हिन्दू अलग हैं
 ताकि पंजाब में क्रांतिकारी आंदोलन को कमजोर किया जा सके। इसके लिए कुछ अंग्रेज़ समर्थक सिक्खों ने एक शाजिस के तहत अभियान चलाया कि सिक्ख हिन्दू नही हैं और अलग धर्म का दर्जा देने की मांग की (जैसे हाल ही में कर्नाटक के कुछ ईसाई बने लिंगायत समुदाय के लोगों ने हिन्दू धर्म से अलग करने की मांग उठाई थी) 

ईसाई मिशनरियों(अंग्रेज़) ने 1922 में गुरुद्वारा एक्ट पारित कर सिक्खों को हिन्दूओं से अलग कर उन्हें अलग धर्म का घोषित कर दिया। और आजादी के बाद भी भारत के विखंडन के जिम्मेदार गुलाबी चचा ने इसे बनाये रखा...!

मित्रो, हिन्दू सिक्खों का खून एक है, हर हिन्दू को गुरूद्वारा जाना चाहिए, हर हिंदू को जीवन में एक बार अमृतसर के हरमंदिर साहिब अवश्य जाना चाहिए 🙏🙏🚩

गुरु गोविन्द सिंह ने 1699 में खालसा (पवित्र) पंथ का गठन किया था और कहा था कि मैं चारों वर्ण के लोगों को सिंह बना दूँगा 🙏🙏

" देश, धर्म व संस्कृति की रक्षा प्राण देकर ही नही, प्राण लेकर भी की जाती है"
जय हिन्द जय भारत
(साभार-फेसबुक) 

Thursday, September 3, 2020

लाकडाउन के हीरो

 इस मिल मालिक ने नहीं निकाला, अपने,

17500 वर्करों में से किसी एक को भी! के.पी.आर मिल्स के मालिक हैं और अंडरवियर बनियान बनाते हैं। भारत ही नहीं, दुनिया की बड़ी कंपनियां उन से माल बनवाती हैं। तिरुपुर और कोयंबटूर में उनकी 4 फैक्ट्रियां हैं जिनमें 22000 वर्कर काम करते हैं।"

"रामास्वामी ने 17,500 हजार जो माइग्रेंट लेबर थी (4500 लोकल, निकट के अपने घर पर रहे) उसको अपनी फैक्ट्री के ही हॉस्टलों में ठहरने को कह दिया और कहा कि जब तक भी lock-down चलेगा तुम लोग चिंता मत करो, तुम्हारा सारा खाना पीना ठहरना, यहां तक की मोबाइल की चार्जिंग भी मेरी तरफ से फ्री।

रामास्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया "प्रति लेबर ₹13500 मासिक का उसका खर्चा आया और इस नाते से कुल 30 करोड रूपया, लगभग 2 महीने में खर्च हो गया। क्योंकि उसने एक भी आदमी की एक भी दिन की सैलरी भी नहीं काटी।"

जब पूछा "आपने इतना नुकसान क्यों सहन किया?" 

उन्होंने कहा "मैंने दोनों बातें सोची। एक तो यह मेरी नैतिक जिम्मेवारी थी कि मैं इनको बेरोजगार ना करूं, आखिर मुझे इतना बड़ा बनाने में इन्ही लोगों का ही तो हाथ है। फिर मुझे यह भी था की लॉकडाउन के बाद मुझे भी स्किल्ड लेबर नहीं मिलेगी। 

इस कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 3250 करोड़ का है लेकिन बड़ी बात है, केपी रामा स्वामी जी ने लेबर के बारे में उच्च स्तरीय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। भारत ऐसे ही लोगों के सहारे चल रहा है.....

(Copy/Paste)

Saturday, January 6, 2018

पित्र दोष से मुक्ति के उपाय

.दोस्तों आज हम आपको पित्र दोष के बारे में बताने जा रहे है .यानी के पित्र दोष क्या होता है इसके क्या कारण है और इसके आपके जीवन पर क्या क्या प्रभाव हो सकते है और पित्र दोष से मुक्ति के क्या उपाय है .


शास्त्रों के अनुसार कुंडली में यदि नवं भाव ,पंचम भाव और सूर्यतथा गुरु राहू या शनि के द्वारा पीड़ित है चाहे उनकी युक्ति हो या दृष्टि तो यह पित्र दोष की अवस्था कहलाती है .पित्र दोष से परिवार की सुख शान्ति समाप्त हो जाती है .परिवार में मानसिक तथा आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होने लगती है .शास्त्रों में इसके लिए काफी उपाय भी बताये गए है जैसे श्राद्ध पक्ष् में पितरों का श्राद्ध करना ,पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना इत्यादि .दोस्तों यह सब हमारे शास्त्रों के हिसाब से बताये गए नियम है . अब हम लोग आज के धरातल पर आकर आज की परिस्थिति से इसका आकलन करके देखते है के आखिर ये पित्र दोष होता क्या है और इसकी वजह और मूल कारण क्या है.
आज की भागम भाग और दौडधूप भरी जिंदगी में हमारे लिए एक दूसरे के पास समय ही नहीं है यहाँ तक की आदमी सिर्फ भागे जा रहा है और सिर्फ भागे ही जा रहा है पर किसके लिए भाग रहा है यह उस भागने वाले इंसान को भी नहीं पता .आजकल की महंगाई भरी जिंदगी में पति पत्नी सबको ही आजकल नौकरी करनी पड रही है परिवारों का ताना वाना ये है के पहले के समय में एक भरा पूरा परिवार होता था जिसमे दादा दादी चाचा चची भाई भाभी सभी होते थे लेकिन आज .आज घरों में अगर होता है तो सिर्फ पति पत्नी और उनके बच्चे .आजकल की भागम भाग और दौड धूप भरी जिंदगी में हमको रिश्तों से बहुत दूर कर दिया है .


खैर चलिए अब आते है मुद्दे की बात पर .दोस्तों कुदरत का एक नियम है के जिसने लिया है उसको जिससे लिया है उससको वह वापस देना भी पड़ेगा चाहे वो किसी से ली हुई जमीद जायदाद हो या हमारे माता पिता द्वारा की हुई हमारी परवरिश . आजका युवा इन सब बातों को दकियानूसी बाते बताता है लेकिन आज की युवा पीढ़ी ही सबसे ज्यादा कर्ज के बोझ में दबी बैठी है और यह बोझ है उनके माता पिता की परवरिश का बोझ . आजके लोगों के मतानुसार अगर माता पिता ने उनको पाल पोसकर बड़ा किया है तो उन्होंने कोई एहसान नहीं किया है यह उनका फ़र्ज़ है तो फिर उन माता पिता के बच्चों का भी तो कोई फ़र्ज़ है न अपने माता पिता के प्रति अपनी पूरी जिंदगी की कमी और अपनी पूरी जिंदगी का अनमोल समय देकर माता पिता अपने बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करते है और बच्चे,बच्चे बड़ा होकर उनके लिए क्या करते  है ...........बच्चे या तो उन्हें वृधाश्रम में छोड़ आते है या फिर उन्हें किसी अकेले से कमरे में बंद करके चले जाते है या फिर BRAIN HAEMORRHAGE से पीड़ित  अपने माता पिता को छत से नीचे फैंक देते है ..हम लोग इस बात का ध्यान क्यूँ नहीं रखते के आज हम जो अपने माता पिता के साथ गलत व्यवहार कर रहे है कल को हमारे खुद के बच्चे भी बड़े होकर हमारे साथ भी वही व्यवहार करेंगे क्युकी बच्चों के ऊपर किसी दूसरे का प्रभाव बाद में पड़ता है सबसे पहले बच्चे अपने माता पिता का ही अनुसरण करते है .आज हमारे घरों में जो बड़े बुजुर्ग है उन्होंने संस्कार अपने बुजुर्गों से सीखे है और उन्हें उनके संस्कारों पे गर्व है .उन्होंने ऐसे संस्कार देखे है जहाँ पर औरते अपने से बड़ों के सामने पर्दा करके रहती थी .आजकल के लोग इसे एक कुरीति और गलत प्रथा का नाम देते है लेकिन यह औरतों द्वारा अपने माता पिता समान बड़ों को दिया जाने वाला सम्मान था . लेकिन आज के समय में काफी औरतें अपने घरों में बड़े बड़े बुजुर्गों  के सामने घुटनों तक के कच्छे और बदन दिखाऊ टी शर्ट पहनके घूमती है और ऐसी औरतें इसको आधुनिकता का नाम देती है जबकि यह आधुनिकता नहीं यह फूहड़ता है और फूहड़ता और नंगेपन को संस्कारों का नाम नही दिया जा सकता है .इसके लिए औरतों के साथ साथ घर के मर्द भी बराबर रूप से जिम्मेदार है जो के जोरू के पालतू जानवर की तरह उसके गुलाम बनके रहते है .आजकल लगभग हर घर में (ALMOST ७०-८०% ) घरों में पारिवारिक कलह या गंभीर बीमारियों का या बेरोजगारी या दूसरे मामले दिखाई देते है और जब हम उनका कुंडली से विश्लेषण करते है तो इसमें कुंडली में पित्र दोष बताया जाता है .इस दोष के निवारण के लिए हम तरह तरह के यत्न करते है जैसे के बड़ी पूजा पाठ या बड़ा कर्मकांड या फिर और कोई तरीका लेकिन यह सब बेकार की बातें है क्युकी जब हम हमारे जीवित बुजुर्गों का ख्याल नहीं रख सकते ,जब हम हमारे जीवित माँ बाप को अपने साथ अपने घरों पर नहीं रख सकते तो उनके गुजर जाने के बाद इस सब झूठ मूठ की पूजा पाठ और दिखावे और आडम्बर का फायदा क्या . और अगर हम इसके लिए पूजा या कोई अनुष्ठान भी करते है तो वो इसके लिए नहीं के हम अपने बुजुर्गों को सम्मान दे रहे है बल्कि इसलिए करते है ताकि हमारे जीवन में आने वाली समस्याएं ख़त्म हो जाए .मतलब यहाँ भी हम स्वार्थ देख रहे है .सनातन धर्म में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि माना गया है क्यों क्युकी उनके लिए उनके माता पिता ही समस्त ब्रम्हांड थे . माता पिता के चरणों में ही सभी देवी देवता निवास करते है हर धर्म में इसे सर्वोपरि माना गया है .माता पिता को भी चाहिए के वो अपनी संतान को सही शिक्षा और सही संस्कार दे . आजकल का युवा अपने घरवालों के साथ रहने की अपेक्षा अपने ससुराल वालों के आचल में छुपकर रहना ज्यादा पसंद करता है .ऊपर वाले की माया भी बड़ी अजीब है उसे पता था के पहले के ज़माने में श्रवन कुमार जैसे बेटे और बहुए होती थी तो पहले बुजुर्ग १०० -१०० साल तक जीते थे लेकिन ऊपर वाले ने जब देखा के कलयुग के राक्षस जैसे बेटे और बहुए उनको मतलब निकल जाने के बाद दर दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ देंगी इसलिए घरों में बुजुर्ग आज वैसे भी ज्यादा समय ताज जीवित नहीं रहते है . जब तक बुजुर्ग कमाते है या जब तक उनका शरीर साथ देता है तभी तक वो जिन्दा रहते है बाद में ऊपर वाला उन्हें किसी न किसी बहाने से अपने पास बुला लेता है .है तो यह कलयुग का ही प्रभाव लेकिन करे क्या . आज हम जो वो रहे है वो हमे भविष्य में काटना ही पड़ेगा .जब हम आज काटे बो रहे है तो आगे जाकर हमे काटे ही तो मिलेंगे .मैं यहाँ आपके साथ एक सच्ची कहानी साझा करना चाहता हूँ . एक घर में एक माँ बीमार होती है .उसके बेटे को हृदाघात की वजह से अस्पताल में दाखिल करना पड़ता है . ६ दिन तक वो व्यक्ति अस्पताल में ही रहता है लेकिन जब अगले दिन जब की उसका ऑपरेशन की सारी तैयारियां चल रही तो उस रात्री को उस व्यक्ति की माँ का देहांत हो जाता है . जब उस व्यक्ति को इस बात का पता चलता है जिसका के अगले दिन ऑपरेशन होना था तो वो व्यक्ति अपना ऑपरेशन कैंसिल करके अपने माँ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गाव निकल जाता है .जब डॉ उससे ऑपरेशन ना करके जाने की वजह पूछते है तो वह व्यक्ति कहता है के सर हम जब छोटे छोटे थे तभी हमारे पिता का देहांत हो गया था हमारी माँ ने बहुत ही मेहनत मजदूरी करके हमे इस स्थिति में लाके खड़ा किया .अगर मैं इस समय उसके अंतिम कार्यक्रम में न जा पाऊं तो अगर मैं सही भी हो जाऊं तो इस जीवन का फिर क्या अर्थ .ज्यादा से ज्यादा मेरी मौत ही होगी न इससे ज्यादा तो और कुछ नहीं होगा न .और वो व्यक्ति नहीं माना और चला गया .माँके अंतिम सस्कार वाले दिन के अगले दिन उस व्यक्ति को हृदयाघात आया और अस्पताल ले जाते वक़्त रास्ते में ही उस व्यक्ति की मौत हो गयी .कुदरत के भी खेल देखिये के जहाँ उस व्यक्ति ने शुक्रवार को अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया था तो रविवार के दिन उस स्थान के बिलकुल पास में ही उस व्यक्ति का अंतिम संस्कार उसके परिजनों ने किया .बाकी मेरे इस लेख का उद्देश्य आज की सामजिक व्यवस्था का सही दर्शन कराना है .
बाकी आप सब समझदार है
मेरा देश महान
जय हिन्द

हेमंत कुमार शर्मा 

Saturday, April 22, 2017

HAWAN VIDHYA हवन विधि

आप सभी को हमारा नमस्कार । हम आज आपको यहाँ एक बहुत पुरानी वैदिक परंपरा के बार में बताने जा रहे है । हवन जिसे हम अग्निहोत्र भी कह सकते है ।पहले के जमाने में हर घर में हर रोज हवन होते थे जिससे हमारे वातावरण की शुद्धि के साथ साथ हमारा आध्यात्मिक और वैदिक शुद्धिकरण भी होता था । हवन से निकली हुई धुंआ आसमान में जाकर बादलों के साथ मिल जाती थी जो आगे जाकर वर्षा में सहायक होती थी । हवन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहाँ भी हवन का आयोजन होता है वह पर किसी भी प्रकार का वास्तुदोष नहीं होता और उस परिवार के लोगों पर किसी भी प्रकार का तांत्रिक अभिकर्म नहीं किया जा सकता क्योंकि हवन में हम समस्त देवी देवताओं का आह्वान करते ही जो कि हमारी हर प्रकार से रक्षा करते है । इसलिए गायत्री परिवार वाले  अग्निहोत्र को ज्यादा बढ़ावा देते है ।आज के इस महंगाई के दौर में जब पूजा पाठ भी इतने महंगे हो गए है तो लोग हवन का खर्च भी उठाने में असहज महसूस करते है । इसलिए हम आज आपको दैनिक हवन की सबसे आसान,सस्ती लघु और असरकारक विधि बताने जा रहे है । आप सभी से निवेदन है कि कृपया आज से ही हर घर का कोई भी एक सदस्य हर रोज घर में दैनिक हवन करे जिससे इस हवन का प्रभाव उस घर के प्रत्येक  सदस्य को मिल सके । इस दैनिक हवन में आपको ज्यादा खर्च करने की भी आवस्यकता नहीं है ।

 दैनिक हवन मे सबसे पहले अग्नि प्रज्वलित करे । किसी लकड़ी( लकड़ी पीपल की या आम की बरगद के ले तो उत्तम रहेगा) पर या गाय के कंडे पर अग्नि प्रज्वलित करे । किसी छोटे से पात्र मे भी  गाय के कंडे पर या लकडी पर अग्नि प्रज्वलित कर सकते है ।पात्र तांबे का या पीतल का या मिट्टी का होना चाहिए । लोहे के पात्र का उपयोग हवन के लिए नही करना है । नीचे लिखी आहूतिया केवल घी से देनी है । आहूति देने के बाद आहूति देने के चम्मच मे बचा हुआ घी इदं न मम के उच्चारण के साथ पास मे रखे पानी के पात्र मे टपकाते जाऐ ।


चार घी की आहुतियाँ
इस मन्त्र से वेदी के उत्तर भाग में जलती हुई समिधा पर आहुति देवें।
1) ओम् प्रजापतये स्वाहा | इदं प्रजापतये - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रजा अर्थात सब जगत के पालक, स्वामी, परमात्मा के लिए मैं त्यागभाव से यह आहुति देता हूँ।अथवा, प्रजापति सूर्य के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ

2)ओम् इन्द्राय स्वाहा | इदं इन्द्राय - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक परमऐश्वर्य-सम्पन्न तथा उसके दाता परमेश्वर के लिए मैं यह आहुति प्रदान करता हूँ।अथवा ऐश्वयर्शाली, शक्तिशाली वायु व विद्युत के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

3)ओम् अग्नये स्वाहा | इदमग्नये - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रकाशस्वरूप दोषनाशक परमात्मा के लिए मैं त्यागभावना से धृत की हवि देता हूँ।यह आहुति अग्निस्वरूप परमात्मा के लिए है, यह मेरी नहीं है।अथवा, यज्ञाग्नि के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

4)ओम् सोमाय स्वाहा | इदं सोमाय - इदं न मम।।
मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक, शांति -सुख-स्वरूप और इनके दाता परमात्मा के लिए त्यागभावना से धृत की आहुति देता हूँ ।अथवा, आनन्दप्रद चन्द्रमा के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

5) ॐ गं गणपतये स्वाहा । इदं गणपतये इदं न मम ।

इसके बाद आप जो भी और जितनी भी चाहे आहूति दे सकते है । जैसे गणपति जी की या गायत्री जी की या अपने ईषट की ।

उसके बाद अंतिम आहूतिया इस प्रकार देनी है ।
6) ॐ भूः स्वाहा । इदं अगनेय इदं न मम ।
7) ॐ भुवः स्वाहा: । इदं वायवे इदं न मम ।
8) ॐ स्वः स्वाहा । इदं सूर्याय इदं न मम ।
9) ॐ भूर्भुवः स्वाहा। इदं न मम ।
10) ॐ प्रजापतये स्वाहा । इदं प्रजापतये इदं न मम ।

इस प्रकार आप घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन कर सकते हो । आज के समय मे प्रत्येक हिन्दू के घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन होना चाहिए ।आप सभी से निवेदन है कि आप इस सन्देश को अधिक से अधिक हिंदुओं तक पहुचाये ।
अग्निहोत्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते है ।
धन्यवाद
पं नलिन शर्मा
Mob No :- 09179271166
हेमन्त शर्मा :- 08460205797
उज्जैन

Wednesday, January 1, 2014

एक सत्य घटना


घटना कुछ दिनों पूर्व की है आगरा से १० कम दूर एक यातायात जाम लगा हुआ था दोनों और के वाहन फसे हुए थे न इधर के वाहन उधर जा सकते थे और न उधर के वाहन इधर आ सकते थे इस बीच एक दो व्यक्तियों के निकलने के लिए जो जगह बची हुए थी उसमे भी दोपहिया वाहन और साइकिल वाले आकर जाम को अपना समर्थन दे रहे थे यह घटनाक्रम एक घंटे तक चलता रहा हलकी हलकी बारिश भी हो रही थी सब लोग अपनी अपनी गाड़ियों में बैठे हुए अपनी मस्ती में मस्त थे और जाम के हटने का इंतज़ार कर रहे थे उसी बीच उसी जाम में फसे हुए वाहनों में से कुछ लोग निकलकर सडक पर आये और उन १५-२० लोगों ने अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए २०-३० मिनट के अन्दर सारा यातायात व्यवस्थित करके आवागमन की स्थिति चालु कर दी उनमे से कुछ लोग ऐसे भी थे जो महँगी गाड़ियों में से उतरकर आये थे ,कुछ लोग दुपहिया वाहन चालक थे तो कुछ लोग साइकिल चालक थे लेकिन सभी का लख्य और ध्येय और इरादा एक ही था के जाम को हटाकर परिवहन की स्थिति को सुचारू रूप से चालू करना उनमे से सायद ही कोई एक दूसरे को जानता था लेकिन वहां पर सब ने एक दूसरे को जाने बिना कंधे से कन्धा मिलाकर काम किया उस जाम में फसे हुए लोगों में से सायद ही किसी ने उन लोगों को धन्यवाद कहा होगा लेकिन उन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई बिना किसी की धर्म,जाति का पता किये बगैर सबकी मदद की.
यह घटना ठीक उसी तरह लगाती है जैसे के आजकल इन्टरनेट पर एक विडियो दिखाया जा रहा है जिसमे एक महानगर में बारिश की वजह से एक पेड़ सड़क पर आ गिरता है और फिर सब व्यवस्था ठप हो जाती है वही पर उस जगह का नेता सम्बंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देता है पुलिस वाला अपनी अतिरिक्त आय का जरिया ढूंढ रहा होता है एक नवयुवक जोड़ा प्रेम प्रसंग के वार्तालाप में व्यस्त दिखाई देता है तो कुछ लोग भारत देश और इसकी व्यवस्था को गाली देते हुए दिखाई देते है वही पर से इस भीड़ में से एक १० साल का लड़का आता है और अकेले अपने दम पर उस पेड़ को वहा से हटाने का प्रयास करता है उसके इस साहस को देख दूसरे लड़के भी उसकी मदद करने के लिए आगे आ जाते है और सभी लोग मिलकर वहा से उस पेड़ को उठाने का प्रयास करते है उन बच्चो के उस साहस को देखकर वहा पर निर्जीव से बुत बने हुए लोगों में अचानक जान आ जाती है और सभी लोग उनकी मदद करने के लिए अपना अहंकार,हठ छोड़कर उस पेड़ को आसानी से एक तरफ कर देते है बाद में उस सच्चे नेता उस १० साल के लड़के को सभी लोग सलाम करते हुए दिखाई देते है
यह विडियो ऐसी किसी घटना से प्रभावित था या यह घटना उस विडियो से प्रभावित थी यह अलग बात है लेकिन एक बात तो तय है के हमारी हठधर्मिता और अहंकार से हम हर रोज न जाने कितने लोगों को नुक्सान पहुचाते है ऐसा जाम आमतौर पर हर नगर,हर गली में देखने को मिल जाता है हम लोग हर जगह पर चक्का जाम लगा कर बैठ जाते है और हम यह भी नहीं सोचते है के हम हमारी इस हरकत से न जाने कितनी जिंदगियों को दाव पर लगा रहे है अगर कोई बीमार व्यक्ति जिसे अपनी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द अस्पताल पहुचना है ,अगर वो उस जाम में फस जाए तो फिर उस स्थिति में उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा ?हम,आप या फिर जाम लगाने वाले वो लोग या फिर यह व्यवस्था ?हमारे देश में आये दिन हड़ताल,बंद और चक्काजाम होता रहता है और हमारे देश के कुछ लोग मौकापरस्त नेताओ की बातो में आकर इस देश को और इस देश की जनता को कितनी हानी पहुचाते है यह हमे भी पता नहीं होगा ऐसा करके इस देश की गरीब जनता को हम और कितना गरीब कर देते है क्या यह हमने कभी सोचा है अगर किसी एक पार्टी के नेता ने दूसरी पार्टी के किसी नेता के खिलाफ कुछ बोला तो उस पार्टी के लोग सडको पर उतरकर जो तोड़फोड़ करते है उसकी तो कोई और मिसाल है ही नहीं यह कहाँ का लोकतंत्र है हम हमारे देश को ही नुक्सान पहुचाते है यह कहाँ की नैतिकता है इस आग में फिर जलता कौन है अमीर या गरीब ?यह सब जानते है हम लोग अपने स्वयम के हाथो से अपने लिए ऐसी साजिस और चक्रव्यूह की रचना कर दते है जिसमे से वापिस निकलना संभव नहीं हो पाता बाद में इन सबका श्रेय हम या तो सरकार को या फिर व्यवस्था को या फिर अपनी आदत के मुताबिक़ ऊपर वाले को दे देते है लेकिन हम अपने बारे में कभी टिपण्णी नहीं करते है के इन सबका वास्तविक जिम्मेदार कौन है ज़रा सोचिये………………..फिर देखिये
अगर आप लोगों को मेरा यह आलेख पसंद आया है तो इसे दूसरों तक पहुचाइए
जय हिंद
हेमंत कुमार शर्मा

Sunday, December 29, 2013

Aam Aadami Party

भाई कमाल हो गया आजकल हर जगह आम आदमी की चर्चा है चुनाव पूर्व देश की परिस्थतियां हो या फिर चुनाव के दौरान की गतिविधिया या फिर चुनाव के बाद के परिणाम और फिर उन परिणामों का विश्लेषण हर जगह पर आम आदमी भारी दिख रहा है अब वो फिर आम आदमी यानि जनता जनार्दन हो या फिर आम आदमी पार्टी मतलब साफ़ है जनता जनार्दन जिंदाबाद अब से ठीक एक साल पहले अन्ना के क्रांतिकारी आंदोलन से उनके कुछ साथी अलग हुए थे और उन्होंने राजनीति का रास्ता अपना के अपनी लड़ाई जारी की थी उस वक़्त कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था कुछ ने उनकी सराहना की थी तो कुछ ने उनके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए थे लेकिन इन लोगो ने हार नहीं मानी एक कहावत है अगर आप गन्दगी को साफ़ करना चाहते है तो इसके लिए आपको पहले खुद गन्दगी में उतरना पड़ेगा बिना गन्दगी में उतरे हुए आप गन्दगी को साफ़ नहीं कर सकते और जब आप गन्दगी में उतरोगे तो उस गन्दगी में छुपी हुई दुर्गन्ध और बुराइयों से आपका आमना सामना होगा तो अन्ना से अलग राह अपनाते हुए उनकी टीम अलग हो गयी और उन्होंने संवैधानिक रास्ता अपनाते हुए राजनीति ज्वाइन कर ली और ऊपर वाले ने भी उनकी इच्छानुसार गन्दगी को साफ़ करने वाला प्रतीक यानि झाड़ू उनको चुनाव चिन्ह के तौर पर दिलाया जिसने काफी हद तक गन्दगी को साफ़ करने में बड़ा योगदान दिया उन्होंने देल्ही विधानसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा और बड़े बड़े धुरंधरों को धुल चटाई उसमे देल्ही की राजनीति की मानी हुई खिलाड़ी और देल्ही की सीट पर पिछले 15 साल से काबिज शीला जी की शर्मनाक हार भी प्रमुख है आम आदमी पार्टीने जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठाया उन्ही के ऊपर चुनाव लड़े उन्ही मुद्दों को घोषण पत्र में शामिल भी किया और फिर उन्ही के दम पे 70 में से 28 सीटे जीतकर देल्ही में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी आम आदमी पार्टी अपने चुनावी वादे पूरा कर सकती है या नहीं यह तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा क्युकी भविष्य के गर्त में क्या छुपा है यह कोई नहीं जानता है लेकिन आम आदमी पार्टी के अभी तक का सफ़र काबिले तारीफ है आम आदमी पार्टी ने 28 सीट मिलने के और देल्ही में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बाबजूद सरकार बनाने में कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई यहाँ तक के कांग्रेस के बिना शर्त समर्थन देने के बाबजूद उन्होंने सरकार बनाने के लिए जनता के बीच में जाने का निर्णय लिया और उन्होंने इस बारे में जनता से पूछने के जो निर्णय लिया वो काबिले तारीफ़ है भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई राजनीतिक पार्टी जनता के इतने करीब आयी है आलोचना करने वाले हमेशा आलोचना ही करते है और करते रहेंगे उनके लिए अगर ऊपर वाला भी नीचे आ जाये तो वो उसकी आलोचना करने से भी नहीं चूकेंगे क्युकी हर किसी की आलोचना करना उनकी पैदायशी और आनुवंशिक बीमारी है तो कुछ लोग आम आदमी पार्टी की आलोचना भी कर रहे है और प्रसंशा भी कर रहे है आम आदमी पार्टी की विरोधी पार्टियां तो उनकी हर कदम पे कमिया ही निकालेंगी जो के उनका काम है भाजपा वाले इस मौके पर बोल रहे है आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का विरोध करके चुनाव जीता और अब उसी कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाकर जनता को धोखा दे रहे है भाजपा वाले जरा इस बात के जबाब देंगे के इस जनता में क्या वो 8-10 लाख लोग सामिल नहीं है जिन्हीने सरकार बनाये या नहीं इस सर्वे में हिस्सा लिया और 70-80 % लोगों ने सरकार बनाने के लिए अपनी सहमति व्यक्त की क्या वो 8-10 लाख लोग इस देश की जनता नहीं है ??? कांग्रेस वाले आप को समर्थन देने के पीछे तर्क दे रहे है के हम जनता के कंधो पर एक और चुनाव का बोझ डालके उसकी कमर नहीं तोड़ना चाहते यानि जनता की कमर तो पहले से ही गले से ऊपर तक आ चुके भ्रस्ट्राचार और महंगाई ने तोड़ दी है और यह तो हम सभी जानते है के देश की जनता ने देशमें कॉंग्रेस्सियों का कैसा हस्र किया था अगर कोई बुरा आदमी अच्छे आदमियों के बीच में आकर बैठ जाता है तो जनता उसे भी अच्छा ही समझने लगाती है बस यही फर्क है के कांग्रेसी अपने आप आम आदमी पार्टी को समर्थन देकर पाप मुक्त और दूध के धुले हुए सावित करना चाहते है वर्ना इसी कांग्रेस की शीला सरकार कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों के सामने प्याज के दाम कम करने के लिए गिड़गिड़ाती थी इस सरकार का अंजाम चाहे जो भी हो आरम्भ तो अच्छा ही है और जनता को हक़ है के हर अच्छी चीज से हम उम्मीद रखे बाकी अपवाद तो हर जगह पर होते है और आप सबतो मुझसे भी ज्यादा समझदार है
मेरा देश महान
जय हिन्द